"आपके शब्द और काव्य ही नहीं, सोच-जो दलितों-पीड़ितों की भाषा में गूँथा है...........हमसे लोकार्पण कराने से धन्य हूँ।"ये शब्द जानी-मानी पर्यावरण कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने उदयप्...
जो सयाने समय के पीछे-पीछे चलते थेऔर वो भी बड़ी सावधानी सेएक निश्चित फासला बनाए रखते हुएमगर अवसर देखते ही पूरे कौटिल्य के साथचोटी को पौनीटेल में बदल लेने की धूर्तत...
हिंदी साहित्य में सूर्यकाँत त्रिपाठी "निराला" का नाम बीसवीं सदी के सर्वश्रेष्ठ कवियों में सबसे ऊपर आता है। छायावाद और प्रगतिवाद की संधि बेला पर बैठकर उन्होंने ऐसा काव्य रचा जो ह...
सुदामा प्रसाद पाँडेय"धूमिल" बीसवीं सदी के प्रमुख कवि थे। अड़तीस साल की उम्र में ही उनकी मृत्यु हो गई थी मगर इस अल्पायु में ही उन्होंने जो कुछ लिखा वह एक अलग छाप छोड़ गया। आज भी ...
सुदामा प्रसाद पाँडेय"धूमिल" बीसवीं सदी के प्रमुख कवि थे। अड़तीस साल की अल्पायु में ही उनकी मृत्यु हो गई थी मगर उनकी कविताएं आज भी लोगों की ज़बान पर रहती हैं। उनकी कविताओं में सम...