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(सम-सामयिक)राजनीति >> अंतरराष्ट्रीय
 
 
अब अमेरिका कबूल करे जुर्म
-विशेष संवाददाता-
वैसे तो इस सचाई को पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान के हुक्मरानों ने आतंकवाद को न केवल जन्म दिया है, बल्कि उसे पालने-पोसने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मगर अब पाकिस्तान क...
फिर से जगज़ाहिर हो गई नोबल पुरस्कार...
देशकाल संवाददाता

शांति का नोबल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा से दुनिया तो आश्चर्यचकित है ही, खुद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा हैरत में हैं। वे कह रहे हैं कि वे इसके लायक नहीं हैं और खुद को विजेताओ...

राष्ट्रपति ने नेपाल को संकट में डाल...
-राजनीतिक विश्लेषक-
क्या नेपाल एक बार फिर अस्थिरता और हिंसक राजनीतिक संघर्ष के रास्ते पर बढ़ रहा है। प्रचंड के नाम से मशहूर प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के इस्तीफे ने इस तरह की शंकाओं को जन्म दिया है। स...
आत्मघाती सियासत के दुष्चक्र में फँस...
-विशेष संवाददाता-
लश्कर ए तय्यबा के सरगना हफीज सईद को आज पाकिस्तान ने ये कहकर रिहा कर दिया कि उसके खिलाफ सबूतों की कमी है. साथ ही उनके प्रधानमंत्री गिलानी साहब ने तीखे लहजे में यह भी कह डाला की कश्म...
तालिबान की गर्दन मरोड़ेगा पाकिस्तान...
-विशेष संवाददाता-
भारत के लिए ये राहत की बात है कि आख़िरकार पाकिस्तान तालिबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है। इस कार्रवाई के शुरूआती नतीजे भी उत्साहजनक दिख रहे हैं। तालिबान को उसके कुछ ठिकानों से पीछ...
दबाव में बनी विदेशनीति तो यही होगा
विशेष संवाददाता
हाल के वर्षों में विदेश नीति से जुड़ा शायद ही कोई ऐसा विवाद रहा हो जिससे सरकार की इतनी भद पिटी हो। सरकार अब भले ही अपने बयान से पीछे हट रही हो कि उसने आतंकवाद को मसले को पाकिस्तान ...
"इस्राइली मिथ" की गिरफ़्त में मीडिय...
जगदीश्वर चतुर्वेदी
इस्राइली सेना के बारे में पश्चिमी मीडिया यह मिथ प्रचारित कर रहा है कि वह कभी गलती नहीं कर सकता। इस्राइली हमेशा जीतेंगे। इस्राइली सेना इस्राइली जनता की रक्षा करेगी। इस्राइली चैनलों ...
नोम चोम्स्की को क्यों सम्मानित करना...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

यह दुनि‍या की वि‍लक्षण सामयि‍क घटना है कि अमेरि‍की सैन्‍य संस्‍थान पेंटागन ने शांति‍ पुरूष नॉम चोमस्‍की को अपने सर्वोच्‍च सम्‍मान से नवाजा है। देखना है वह यह सम्‍मान लेते हैं या...

बड़े मुल्कों के ख़िलाफ़ बड़ा प्रदर्...
-देशकाल-
भले ही दुनिया के बीस बड़े और कुछ उनसे छोटे मुल्क दुनिया की अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने की मगज़मारी कर रहे हों मगर जहाँ तक आम लोगों का सवाल है उन्हें उनसे कोई ख़ास उम्मीद नहीं है...
फिलीस्तीनियों की अतुलनीय कुर्बानी औ...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

जो लोग मुक्ति के लिए संघर्ष करते हैं वे खुदगर्ज नहीं होते। फिलीस्तीनियों का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही है उनमें अपने वतन को पाने की जितनी चाह है उससे भी ज्यादा गहरी सहानुभूति दूसरों क...

इस तरह मीडिया की मुश्कें कसती है ची...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

चीन में मीडिया नियंत्रण के तरीके क्या हैं ? पहला, यदि कोई पत्रकार चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की पसंद के खिलाफ लिखता है तो पदावनति कर दी जाती है या नौकरी से निकाल दिया। दूसरा, सरक...

हमारी चिंता से गायब हो गया है इस्रा...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

एक जमाना था हिन्दी में साहित्यकारों और युवा राजनीतिक कार्यकर्त्ताओं में युध्द विरोधी भावनाएं चरमोत्कर्ष पर हुआ करती थीं,हिन्दीभाषी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में युध्द विरोधी गोष...

फिलीस्तीन के महान गुरु इब्राहिम अबू...
एडवर्ड सईद

लंबी बीमारी के बाद बहत्तर वर्ष की आयु में 23 मई को इब्राहिम अबू लोग़द अपने रामल्लाह स्थित घर में चल बसे। वे नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक रहे और ब...

फिलीस्तीन के बिना अधूरा है प्राच्यव...
सुधा सिंह

आलोचकगण जब 'ओरिएण्टलिज्म' पर विचार करते हैं तो यह भूल जाते हैं कि आखिरकार सईद को यह किताब लिखने की जरूरत क्यों पड़ी ? यह किताब जब लिखी गयी थी तब सारी दुनिया में नए सिरे से नव्य-औ...

गाजापट्टी की नाकेबंदी और जनता की तब...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

गाजा की इस्राइल द्वारा नाकेबंदी जारी है। हजारों लोग खुले आकाश के नीचे कड़कड़ाती ठंड में ठिठुर रहे हैं , इन लोंगों के पास न तो कम्बल हैं, न टैंट हैं, न खाना है, न पीने का साफ पान...

फिलीस्तीन जनता का महान् कवि महमूद द...
विजया सिंह

फिलिस्तीन के राष्ट्रीय कवि महमूद दरवेश मातृभूमि के प्रेम और उस पर इस्राइली कब्ज़े के दर्द से सराबोर हैं। उनकी कविता देश निकाला झेलते व्यक्ति की टूटन, पीड़ा को तो व्यक्त करती ही है...

फिलीस्तीन के ध्रुवतारे थे एडवर्ड सई...
हितेन्द्र पटेल

प्रख्यात विद्वान एडवर्ड सईद (1935-2003) अब नहीं हैं । इनकी मृत्यु के बाद सारी दुनिया के बौद्धिक जगत में एक खालीपन का अहसास बहुतों को हुआ होगा। आज के उत्तर-आधुनिक दौर में जहां वि...

फिलीस्तीनी समस्या को कायम रखना चाहत...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

फिलीस्तीन-इस्राइल विवाद का निष्कर्ष यह है कि साम्राज्यवाद के लिए शांति बेकार की चीज है। शांति बोगस है। खोखली है। शांति का जाप करना बेकार है। शांति वार्ताएं व्यर्थ हैं। कब्जा सच्...

चीन जैसा तामझाम या भारत जैसी आज़ादी...
डॉ प्रवीण तिवारी

चीन में साम्यवाद के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बेहतरीन आतिशबाज़ी और ज़बरदस्त सामरिक शक्ति का प्रदर्शन ये साफ़ करता है की चीन दुनिया को ये बताना चाहता है कि उस जैसा कोई नहीं। ओ...

इंटरनेट पर फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह
देशकाल

भारत की जनता और विभिन्न रंगत के राजनीतिक दल एकजुट होकर फिलीस्तीन राष्ट्र के सवाल पर फिलीस्तीन मुक्ति संग्राम का 60 साल से समर्थन करते रहे हैं। ग्लोबलाइजेशन की अमरीकापंथी आंधी ने...

फिलीस्तीन मुक्ति का सपना और एडवर्ड ...
सुधा सिंह

एडवर्ड सईद को सन् 1978 के पहले दुनिया में बहुत कम लोग जानते थे। सन् 1978 में 'ओरिएण्टलिज्म' किताब के प्रकाशन के साथ उनके विचारों और गतिविधियों की ओर सारी दुनिया के बुध्दिजीवियों...

य़ासिर अराफ़ात और फिलिस्तीनी मुक्ति स...
विजया सिंह

यासिर अराफ़ात ने इस्रायल के खिलाफ अरब का साथ तो दिया पर उन्होंने फिलिस्तीनी स्वायत्तता और मुक्ति के मसले को बिल्कुल भिन्न रूप में स्वीकार किया। यासिर अराफ़ात की सोच उन तत्कालीन रा...

इस्राइल के युध्दापराध और दुनिया की ...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

फिलीस्तीनी जनता का संघर्ष अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। समस्त राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और फैसलों को ताक पर रखकर इस्राइल अपनी विस्तार वादी नीति पर कायम है। अम...

"सभ्य" देश का झूठा राष्ट्रपति
जगदीश्वर चतुर्वेदी

अमेरि‍का के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने स्‍वास्‍थ्‍य और चि‍कि‍त्‍सा की अमेरि‍का में स्‍थि‍ति को लेकर हाल ही में अपने देश की सीनेट में जब बयान दि‍या तो सीनेटरों ने ओबामा को झूठा तक...

इसलिए करनी चाहिए पाक से वार्ता
-मुस्तफ़ा फ़कीर-

अधिक जानें

पाकिस्तान में निर्णायक कार्रवाई की ...
-देशकाल संवाददाता-
पाकिस्तान अपने जन्म के बाद के सबसे बड़े संकट से दो-चार हो रहा है। हर तरफ अनिश्चितता का माहौल है और इसने न केवल भारत या अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए अस्थिरता का संकट पैदा कर दिया...
पूँजीवाद का पुजारी बना समाजवाद का झ...
-देशकाल-
अमेरिका को हो क्या गया है? हमेशा से समाजवाद को अपना शत्रु बताने वाला ये देश मंदी की मार से बचने के लिए समाजवादी उपायों की शरण क्यों ले रहा है? क्या उसने मान लिया है कि समाजवाद ही स...
ओबामा चले स्वदेशी की राह
-कबीर-
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा अमरीकियों से कह रहे हैं कि वे अब अमेरिकी उत्पाद ही खरीदें, क्योंकि मुल्क मंदी की गिरफ़्त में है। उनके कहने का मतलब है कि अगर अमरीकी विदेशी वस्तुओं ...
इतिहास को अलविदा कहने के निहितार्थ
सीताराम येचुरी

पूँजीवादी मुल्क समाजवाद की नई धारा से घबराए हुए हैं। लेटिन अमेरिकी देशों और यहाँ तक कि यूरोप में भी समाजवादी रूझान बढ़ रहा है और इससे चिंतित पूँजीवादी मुल्क इतिहास को ही तोड़-मर...

 
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