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समावेशी बजट के राजनीतिक निहितार्थ
-आर्थिक संवाददाता-
नई सरकार का पहला बजट किसी बड़ी आर्थिक दृष्टि और दीर्घकालिक योजना के बजाय संकुचित राजनीतिक स्वार्थों से प्रेरित ज़्यादा है। रेल बजट की ही तरह आम बजट में भी मुख्य रूप से ध्यान इस बात...
कार्पोरेट के वारे-न्यारे,आम अवाम को...
विशेष संवाददाता
जब अर्थव्यवस्था तेज़ी के दौर में थी तब भी सारी रियायतें और सहूलियतें उद्योग और व्यापार जगत को दी जा रही थीं और अब जबकि मंदी की मार पड़ रही है तो वही कार्पोरेट जगत कटोरा लिए सरकार क...
पाउच में दाल,गरीबी का देखो हाल
ब्रजेश

दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ वाले दिन अब लद गये। मध्यप्रदेश के कस्बों में अब दाल पैकेट नहीं पाउच में मिल रही हैं। ये पाउच एक रूपए से लेकर दो रूपए पांच रूपए और दस रूपए तक के हैं...

ख़ास ख़बर
"चमकते भारत" में बेरोज़गारों की बढ़...
प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि विश्वव्यापी आर्थिक मंदी का कोई असर भारत पर नहीं पड़ेगा। वे या तो खुद भ्रम में हैं या फिर देश को भ्रम में रखना चाहते हैं। लेकिन हक़ीक़त ये हैं कि मंदी की ...
खुदरा बाज़ार को खोलने के ख़तरे
-आर्थिक संवाददाता-
नवगठित केंद्र सरकार के हाव-भाव से दिखाई दे रहा है कि वह अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खुदरा बाज़ार को खोलने के लिए बेचैन हो रही है। आर्थिक उदारवाद का समर्थक मीडिया इसके लिए सरकार...
विकास के चोखे धंधे से फलते-फूलते पर...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

मीडिया के खेल आकर्षक ,निराले और बोगस होते हैं। खासकर आर्थिक उदारीकरण,चैनल क्रांति,केबल क्रांति,नेट क्रांति के बाद ज्ञान कम और मीडिया बेहूदगियां और न्यूसेंस में तेजी से इजाफा हुआ...

"कर लो इंडिया मुट्ठी में"
आर्थिक संवाददाता

उद्योगपति किस तरह से सार्वजनिक संपत्ति पर कब्ज़ा कर रहे हैं और कैसे सरकार इससे आँखें मूँदे रहती है, इसकी ताज़तरीन मिसाल है अंबानी बंधुओं का नया विवाद। कृष्णा-गोदावरी बेसिन से नि...

भारत के झुकने से खेती पर बढ़ा ख़तरा
-वाणिज्य संवाददाता-

अधिक जानें

हमें ईस्ट इंडिया कंपनी की ज़रूरत क्...
-देशकाल संवाददाता-
ये अकसर कहा जाता है कि भारत सोने की चिड़िया था,मगर अँग्रेजों ने लूट-लूटकर इसे कंगाल कर दिया। लेकिन अँग्रेजों को कोसने वाले क्या ये जानते हैं कि जितना ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत को न...
ब्रांडों की मायावी दुनिया मज़दूरों ...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

ग्लोबलाइजेशन का युग ब्रॉण्ड का युग है।आप चारों ओर लोगोज देखते हैं। यहां तक कि आपकी निजी जीवन की अवस्था में भी लोगोज देखते रहते हैं।सार्वजनिक स्थानों से लेकर व्यक्तिगत बाथरुम तक ...

ज़मीन पर फूटे बदलाव के बीज
-शिरीष खरे-
जिन दलितों से रोजाना रोटी की उलझन नहीं सुलझती थी अब वही पत्थरों के रास्ते बदलाव की तरकीब सुझा रहे हैं। जानवर चराने वाली पहाड़ियों पर ज्वार पैदा करने की सूझ अतिशेक्ति अंलकार जैसी लग...
शिवराज के मध्यप्रदेश में कुपोषण से ...
शिरीष खरे

यह हाल आदिवासी जिले झाबुआ का है, जहां मेघनगर ब्लाक के अगासिया और मदारानी गांवों में बच्चों की मौत का सिलसिला है कि टूटता ही नहीं। फिलहाल पूरा मध्यप्रदेश ही इतना भूखा है कि यहां ...

कौन नहीं है शामिल लालू के गुनाह में...
-आर्थिक संवाददाता-
अगर ममता बैनर्जी के बयान को सही माना जाए तो ये मानना पड़ेगा कि पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रेल्वे के मुनाफ़े को कई गुना बढ़-चढ़कर दिखाया। ममता के मुताबिक रेल्वे के खज़ाने म...
 
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