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धोखा हैं चुनाव?
पिछले लगभग साठ साल से चुनाव हो रहे हैं,मगर चुनाव में होता क्या है...नक़ली मुद्दे, झूठे वादे,भ्रष्ट प्रत्याशी,जातीय और सांप्रदायिक आधार पर राजनीति,धन और बाहुबल के इस्तेमाल से वोट हासिल करने की तिकड़में..यही सब। इस बार भी वही हो रहा है और एक बार फिर कोई पार्टी या गठबंधन सरकार बनाएगा,देश पर रा करेगा और आम अवाम को मिलेगा ठेंगा। नेता अपनी जेबें भरेंगे,अपने सगे-संबंधियों,पूँजीपतियों और दूसरे समर्थ तबकों को खुश रखने के लिए तमाम तरह के धतकरम करेंगे। सवाल उठता है कि ऐसे में चुनाव का क्या मतलब है। क्या वे एक धोखा नहीं हैं...एक रस्मअदायगी,लोकतंत्र का स्वाँग...और लोगों से बहुत बड़ा छल?
आपकी राय बहुत महत्व रखती है,हमारे लिए,आपके लिए और पूरे मुल्क के लिए,क्योंकि ऐसे मुद्दों पर चुप्पी तोड़ना ज़रूरी होता है।
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तो फिर देर किस बात की,फौरन की बोर्ड पर उँगलियाँ चलानी शुरू कर दीजिए।
धन्यवाद्..। -संपादक
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संतोष शुक्ला शहडोल, मध्यप्रदेश(भारत) से
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हमारा अभी तक का अनुभव तो यही कहता है कि चुनाव एक धोखा है। पिछले साठ साल से हम चुनाव की भूल-भुलैया में ही भटक रहे हैं। दरअसल मौजूदा व्यवस्था में वह वर्ग हमेशा हावी रहता है जिसके पास धन की शक्ति है या बाहुबल है। ऐसे में मेहनतकश और ईमानदार वर्ग के प्रतिनिधि कैसे चुने जाएँगे और अगर वे चुने नहीं जाएंगे तो किसी तरह के परिवर्तन की उम्मीद रखना मृगतृष्णा के सिवा कुछ नहीं हैं। कुछ लोग कहते हैं कि चुनाव सुधार हो जाएंगे तो स्थिति बदल जाएगी, मगर मुझे नहीं लगता कि शासक वर्ग इस तरह के किसी चुनाव सुधार को मंज़ूरी देगा जिससे उसके हाथ से सत्ता निकलने का ख़तरा हो। वह तो छोटे-मोटे परिवर्तनों के साथ चुनाव के इस भ्रम को बनाए रखेगा और हम ये सोचकर वोट डालते रहेंगे कि वोट डालना हमारा लोकतांत्रिक दायित्व है। सच तो ये है कि वोट डालने की अपील करने वाले तमाम तरह के विज्ञापन या अनुरोध चुनाव नामक धोखे को महिमामंडित करने के अलावा कुछ नहीं करते।
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नितिन गोडबोले नागपुर, महाराष्ट्र(भारत) से
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चुनाव धोखा है तो भी ये एक खूबसूरत धोखा है जैसे कि लोकतंत्र अपने आप में एक बड़ा भ्रम है धोखा है। लोग वोट डालकर सत्ता परिवर्तन करते हैं और मान लेते हैं कि परिवर्तन हो गया, जबकि बदलता कुछ भी नहीं है। घूम-फिरकर वही भ्रष्ट और निकम्मी ताक़तें सरकार बनाती हैं और उसी वर्ग को पालने-पोसने में जुट जाती हैं जो पूरे देश की अवाम का शोषण करने में लगी हुई हैं। लेकिन किया भी क्या जाए। जब तक आमूल-चूल परिवर्तन के लिए हालात नहीं बनते हैं तब तक पप्पू वोट देता रहेगा और मुन्ना भाई लगे रहेंगे।
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ashutosh pathak unnav, Uttar Pradesh(भारत) से
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Ghalib chacha kah gaye hain-hamko maloom hai jannat ki haqiqat lekin dil ke bahlane ko ghalib ye khayal achchha ha.unka ye sher chunav ki sachai batane ke liye bahut sateek hai.
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