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    अंक-89
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    पूरी तरह से जायज़ है आरक्षण के भीतर आरक्षण की माँग
    हस्तक्षेप/ सुधा सिंह

    स्त्री आरक्षण का मुद्दा समाज में स्त्री की अलग पहचान का मुद्दा है। स्त्री के साथ समाज का विषम संबंध ,उसका शोषण और दमन ,राजनीतिक सामाजिक पिछड़ापन आदि तर्कों के पीछे सर्वोपरि तर्क है स्त्री की भिन्नता का तर्क। स्त्री की जैविक ,ऐच्छिक और सामाजिक-राजनैतिक जरुरतें बिल्कुल वही नहीं हैं जो मुख्यधारा की जरुरतें हैं और जिनके तहत समग्र रुप से स्त्री को घटाया जाता है। भिन्नता के इस सवाल को तब अहमियत मिली अधिक जानें...

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    हुसैन साहब यूं मैदान छोड़ना सही नहीं
    जगदीश्वर चतुर्वेद...

    एफ एम हुसैन साहब बहुत बड़े चित्रकार हैं,भारतीय चित्रकला परंपरा में उनका गौरवपूर्ण स्थान है। भारतीय कला के उन्होंने अन...

    बाल ठाकरे एंड कंपनी के गालों पर थप्पड़ पर थप्पड़
    अष्टावक्र

    शिवसेना और उसके प्रमुख बाल ठाकरे को एहसास हो गया होगा कि दुनिया अब बहुत बदल गई है। अब मुंबई में भी उनको न कोई पसंद कर...

    विशेष   
    य़ासिर अराफ़ात और फिलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष
    विजया सिंह

    यासिर अराफ़ात ने इस्रायल के खिलाफ अरब का साथ तो दिया पर उन्होंने फिलिस्तीनी स्वायत्तता और मुक्ति के मसले को बिल्कुल भि...

    फिलीस्तीन मुक्ति का सपना और एडवर्ड सईद का प्राच्यवाद
    सुधा सिंह

    एडवर्ड सईद को सन् 1978 के पहले दुनिया में बहुत कम लोग जानते थे। सन् 1978 में 'ओरिएण्टलिज्म' किताब के प्रकाशन के साथ उ...

    आजकल   
    नैतिकता की तमाशेबाज़ी में लगे शिवराज
    प्रवीण दुबे
    मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री इन दिनों खुद को न केवल काम काज से बल्कि नैतिकता के लिहाज़ से भी बड़ा साफ़ सुथरा दिखाने की कोश...
    तसलीमा को मिलनी चाहिए पूरी सुरक्षा
    सत्य नारायण पटेल

    तसलीमा एक लेखिका के रूप में मुझे नापसंद तो नहीं, पर हाँ… बहुत कम पसंद है। लेकिन तसलीमा के साथ इस तथाकथित सभ्य समाज के...

    सामयिक   
    सरकार और माओवादियों, दोनों के लिए मोहरे हैं आदिवासी
    विलंबित/ अपूर्वान...

    माओवादी हिंसा जायज़ है या नाजायज़? यह तसल्ली की बात है कि इस सवाल पर अब बहस शुरू हो गई है. इस प्रश्न पर बात करने का अ...

    सैय्यद मदारी को कोई नहीं जानता...?
    शिरीष खरे

    कभी एक्सट्रा आर्टिस्ट के तौर पर काम करने वाला अक्षय कुमार आज बालीवुड का सुपर स्टार कहलाता है। मगर सैय्यद मदारी नाम की...

    मीडिया/सिनेमा   
    "दो कौड़ी के पत्रकार" और भ्रष्ट आई ए एस
    प्रवीण दुबे

    भोपाल में इन दिनों मीडिया के लिए बेहद हंगामे भरे और थकाऊ दिन बीत रहे हैं.दरअसल आयकर विभाग भृष्ट आई ऐ एस दम्पत्ति अरवि...

    सास-बहू की टक्कर में उलझे चैनल
    टीआरपी गुरु

    टीआरपी की रेस चालू है.. हर हफ्ते की तरह इस हफ्ते भी आंकडे आ गए है और इनमें कोई ज्यादा बदलाव नहीं है.. करीब डेढ साल से...




     
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    देशभक्ति चड्ढी बनियान नहीं जिसका प्रचार करना पड़े
    हस्तक्षेप/सुधा सिं...

    हिन्दी फिल्मों के बादशाह शाहरूख खान की नई फिल्म 'माई नेम इज़ खान' 12 फरवरी को प्रदर्शित होने जा रही है।...

    मोदी और अमिताभ का हाइपर मिलन
    जगदीश्वर चतुर्वेदी

    गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के ब्राँड एम्बेसडर के रुप में अमिताभ बच्चन की स्वीकृति ह...

    फिलीस्तीनियों की अतुलनीय कुर्बानी और मानवता
    जगदीश्वर चतुर्वेदी

    जो लोग मुक्ति के लिए संघर्ष करते हैं वे खुदगर्ज नहीं होते। फिलीस्तीनियों का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही है उन...

    उद्योगपतियों के लिए लड़ना चाहती है सरकार
    अरुंधती राय

    केंद्र सरकार नक्सलियों के ख़िलाफ़ सेना का इस्तेमाल करने के लिए कमर कस रही है। उसका कहना है कि नक्सलवाद...

    फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह पर पेश हैं कुछ फिलिस्तीनी कविताएं
    अनुवाद-विजया सिंह

    ताहा मुहम्मद अली फिलिस्तीनी साहित्य के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं। सफूरिया के गैलिली ग...

    जेएनयू की विलक्षणता है छात्र स्प्रिट
    जगदीश्वर चतुर्वेदी

    जेएनयू की 'स्‍प्रि‍ट' का स्रोत हैं छात्र। छात्रों की एकता,सहनशीलता,मि‍तव्‍ययता,अनौपचारि‍कता, बौद्धि‍कत...

    तिलक और उसके साथियों को सलाम
    समय सरगम/राजेश बाद...

    पच्चीस साल पहले की वो रात षायद ही कोई याद रखना चाहे। लेकिन यह मुमकिन नहीं। वो कयामत की रात थी , जिसे भ...

     
    साहित्य/संस्कृति   
     
    फिलीस्तीन के ध्रुवतारे थे एडवर्ड सई...
    हितेन्द्र पटेल

    प्रख्यात विद्वान एडवर्ड सईद (1935-2003) अब नहीं हैं । इनकी मृत्यु के बाद सारी दुनिया के बौद्धिक जगत में एक खालीपन का अहसास बहुतों को हुआ होगा। आज के उत्तर-आध...

    फिलीस्तीन के बिना अधूरा है प्राच्यव...
    सुधा सिंह

    आलोचकगण जब 'ओरिएण्टलिज्म' पर विचार करते हैं तो यह भूल जाते हैं कि आखिरकार सईद को यह किताब लिखने की जरूरत क्यों पड़ी ? यह किताब जब लिखी गयी थी तब सारी दुनिया म...

    मुक्तिबोध ने मार्क्सवाद का अतिक्रमण...
    अशोक वाजपेयी

    बड़े लेखक के सामने एक समस्‍या नहीं होती ।अनेक समस्‍याएं होती हैं। यह स्‍थि‍ति‍ मुक्‍ति‍बोध की भी है। समस्‍या बहुलता एक स्‍तर पर छायावादी भाषा संस्‍कार की थी ...

    फिलीस्तीन जनता का महान् कवि महमूद द...
    विजया सिंह

    फिलिस्तीन के राष्ट्रीय कवि महमूद दरवेश मातृभूमि के प्रेम और उस पर इस्राइली कब्ज़े के दर्द से सराबोर हैं। उनकी कविता देश निकाला झेलते व्यक्ति की टूटन, पीड़ा को ...

     


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